बुधवार, 26 जुलाई 2017

दो दिल मिल गए हैं......मगर चुपके-चुपके




दो दिल मिल रहे हैं, मगर चुपके-चुपके,
सबको हो रही है खबर चुपके-चुपके....

हिंदी फिल्म परदेस फिल्म का ये गाना नीतीश कुमार (जेडीयू) और नरेंद्र मोदी (बीजेपी) के एक बार फिर से एकसाथ आने की पूरी कहानी बताता है। दरअसल बुधवार (26 जुलाई 2017) को अचानक नीतीश कुमार का बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना, आरजेडी से किनारा करने का घटनाक्रम बहुत तेजी से हुआ, लेकिन इसकी स्क्रिप्ट धीरे-धीरे व काफी दिनों से लिखी जा रही थी। पर जैसे ही तेजस्वी यादव भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे, वैसे ही इस पुराने रिश्ते को एक डोर मिल गई और इस्तीफे के कुछ घंटे बाद ही बीजेपी ने जेडीयू को सपोर्ट देकर सुशासन बाबू के एक बार फिर सीएम बनने का रास्ता साफ कर दिया और दोनों ने खुलकर दुनिया के सामने मिलने का ऐलान कर ही दिया।

  अब सवाल उठता है कि आखिर सच में नीतीश ने तेजस्वी पर लगे आरोपों व उसके बाद भी उप-मुख्यमंत्री पद से उनके  इस्तीफा न देने की वजह से महागठबंधन का साथ छोड़ इस्तीफा दिया या फिर कोई और वजह थी। अगर पिछले डेढ़ साल से अलग-अलग मुद्दों पर नरेंद्र मोदी के समर्थन में दिए गए नीतीश कुमार के बयानों को देखें, तो इस सवाल का जवाब मिल जाता है। नीतीश कुमार पुरानी बातों को भुलाकर कब से बीजेपी व मोदी के साथ आने का रास्ता बना रहे थे।
आइए जानते हैं आखिर कब-कब नीतीश के दिल में नरेंद्र मोदी के लिए प्यार जागा।




-जनवरी 2016 में जब पीएम नरेंद्र मोदी अचानक लाहौर पहुंचे थे और पाकिस्तान के पीएम नवाज शरीफ से मिले थे, तो सभी विपक्षी दलों ने इस कदम की निंद की थी। लालू यादव ने 56 इंच के सीने पर सवाल उठा दिया था, लेकिन नीतीश कुमार ने तारीफ करते हुए कहा था कि, इससे भारत और पाकिस्तान के बीच के विवादित मुद्दों को सुलझाने में मदद मिलेगी, ये अच्छी पहल है।

-29 सितंबर 2016 को जब भारतीय सेना ने पाकिस्तान अॉक्युपाइड कश्मिर में सर्जिकल स्ट्राइक किया था, तो सभी विपक्षी दल इस पर भी सवाल उठाने लगे थे। पर यहां भी नीतीश कुमार ने खुलकर केंद्र सरकार और भारतीय सेना की ओर से आतंकवाद के खिलाफ की गई इस कार्रवाई का समर्थन किया था।

-8 नवंबर 2016 को जब पीएम नरेंद्र मोदी ने 500 रुपये व 1000 रुपये के नोट को बंद करने का फैसला किया, तो पूरा विपक्ष उनकी आलोचना कर रहा था। नीतीश कुमार के साथी लालू यादव ने भी मोदी के इस फैसले की निंदा की, लेकिन सीएम नीतीश कुमार ने मोदी का सपोर्ट करते हुए कहा था कि इस फैसले से कालाधान व जाली नोटों को रोकने में मदद मिलेगी। उन्होंने बेनामी संपत्ति के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी पीएम से की थी।

-5 दिसंबर 2016 को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी टाइम मैगजीन के पर्सन अॉफ द ईयर के सर्वे में आगे रहे थे, तो भी नीतीश कुमार ने जमकर उनकी तारीफ की थी।

-5 जनवरी 2017 को गुरु गोविंद सिंह के 350वें प्रकाश पर्व के मौके पर पटना में आयोजित कार्यक्रम में सीएम नीतीश कुमार ने पीएम मोदी की खूब तारीफ की थी। वहीं पीएम ने शराबबंदी के फैसले पर सुशासन बाबू की जमकर प्रशंसा की थी। मोदी ने प्रकाश पर्व आयोजन की सफलता के पीछे भी नीतीश कुमार का हाथ बताया था।

-मार्च 2017 में यूपी और उत्तराखंड में बीजेपी को मिले प्रचंड बहुमत पर भी नीतीश कुमार ने केंद्र सरकार के फैसलों की तारीफ करते हुए कहा था कि विपक्ष को इसका विरोध नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे गरीब तबके को राहत मिली, इसलिए हर वर्ग ने बीजेपी को वोट दिया।

-21 जून 2017 को नीतीश कुमार ने एनडीए की ओर से घोषित राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को समर्थन देने का ऐलान करके सभी विपक्षी दलों को हिला दिया था। 

मंगलवार, 4 अगस्त 2015

खोखला समाज

मैं संत्रस्त हूं
भारत के आज से
इस खोखले समाज से
आने वाला कल मुझे बहुत डराता है
क्यों आज इंसान एक-दूसरे का घर जलाता है।

मैं संत्रस्त हूं
देश के रखवालों से
रिश्वत के दलालों से
जाने कितने खूनी खेल ये खेलते हैं
देख कर खून के धब्बे उफ तक नहीं करते हैं।

मैं संत्रस्त हूं
भारत की राजनीति से
नेताओं की नीति से
वोट बैंक की नीति इन्हें खूब रास आती है
इनके हर बात में राजनीति की बास आती है।

गुरुवार, 10 फ़रवरी 2011

पैसा

मरना तो आसान होता है, जीना आसान नहीं होता
यदि पैसा हो पास तो कोई भी अनजान नहीं होता
टूट जाते हैं सब रिश्ते जब हम गरीब होते हैं
अगर पैसा रहे पास तो सब करीब होते हैं।

शनिवार, 11 दिसंबर 2010

लाचार व्यक्ति

सड़क के चौराहे पर
एकतरफ थी बहुत भीड़-भार
वंही दूसरी तरफ कोने में
खड़ा था एक व्यक्ति लाचार
खुद को छिपाता हुआ
भीड़ से खुद को बचाता हुआ।

मैं बढ़ा उस भीड़ की तरफ
अपनी जिज्ञासा लिए
जायजा लेने हालात का
आखिर ये भीड़ कैसी
झगड़ा है किस बात का
अचानक उस भीड़ से निकला
एक व्यक्ति ये कहते
' ये धरती हमारी है, मारो उसे जो बिहारी है '।

मैं छुब्द था देखकर
इन लोगों की हंसी को
दूसरी और कोने में खड़े
उस शख्स की बेबसी को
खुद को बचाने की जद्दोजहद में
घिरा था वो इंसान
क्या वाकई ये लोग
ले लेंगे उसकी जान।

पर क्यों हो रहा है
कुछ लोगों के साथ ये व्यवहार
क्या सिर्फ इसलिए की
उनकी जन्म भूमि है बिहार ।

बहुत ही बेहुदे हैं वो लोग
जो पहुंचा रहे हैं
इसी देश के निवासी को चोट
क्या अपने ही देश में रहने का
इन्हें हक नहीं है
क्या भारत बिहार का राज्य नहीं है ?

बहुत शर्मनाक है ये
जो इस देश के रहने वालों पर
इस तरह अत्याचार हो
और देश की सरकार
चुपचाप बैठी लाचार हो।

यही सरकार बांग्लादेशियों को
देश की नागरिकता दिलाती है
इनके विषय पर शोर मचाती है
लेकिन अपनों के वक्त में
गूंगी हो जाती है।

क्या सफेद पोशाक धारियों से
इन लोगों की करुणा देखी नहीं जाती
या फिर देश के कुछ गरीब और
बिहारी के नाम पर उनसे
राजनीती की रोटी सेकी नहीं जाती।

गुरुवार, 9 दिसंबर 2010

मैं बेटी हूं...

न मैं दुनिया में आई थी,
न अपनी आंखें खोल पाई थी
फिर भी मृत्यु शैय्या पर लेटी हूँ
क्यों, क्योंकि मैं बेटी हूं?

जबकि उत्तम कर्म मेरा है
फिर क्यों मुश्किल जन्म मेरा है
वो जो मां की गोदी में लेटा है
इसलिए की वो बेटा है?

दुख जो मां-बाप को देता है
और नहीं कोई, वो बेटा है
सुख मां-बाप को जो पहुंचाती
जन्म नहीं है वो ले पाती।

क्यों अब भी अभिशाप है बेटी
क्यों आखिर मां जन्म न देती
खुशी मनातें हैं सब लोग
जब जन्म लेता है बेटा
और जन्म जो ले ले बेटी
पिता कंही उदास है लेटा।

रविवार, 28 नवंबर 2010

डीडीए फ्लैट्स

आजकल हर तरफ है दिल्ली में डीडीए फ्लैट्स का शोर
हर कोई फ्लैट्स खरीदने के लिए कर रहा है जोड़-तोड़
कोई निकाल रहा है अपनी जिन्दगी भर की कमाई
तो किसी ने लोन के लिए है अर्जी लगाई

हर किसी को है इंतजार आखिर कब निकलेगा ड्रॉ
सिंगल ही सही लेकिन अपना एक घर हो
हर कोई देख रहा है खुली आंखों से सपना
हे भगवान इनके सपनो को बचाए रखना


क्या भ्रष्ट अफसरों से बच पाएगा सपना इनका
वो अफसर जिन्हें कोई परवाह नहीं किसी के जीने मरने से

वो क्या करेंगे इनके सपनों की परवाह
जिन्हें सिर्फ मतलब है अपनी जेब गर्म करने से।


पता नहीं क्या होगा इसका परिणाम
लेकिन तय है रंगीन होगी अफसरों की शाम
हो सकता है सामने आए एक और घोटाला
और निकल जाए लाखों लोगों के सपनो का दिवाला ।

घोटाला सामने आते ही सरकार गंभीरता दिखाएगी
मामले की जांच तेजी से कराएगी
कुछ दिन बाद तेजी से हो रही जांच डी-रेल हो जाएगी
बड़ी मछलियां आजाद घूमेंगी और छोटी को जेल जाएगी।

सोमवार, 25 अक्तूबर 2010

क्या हुआ जो प्रिय तुम मेरी नहीं

क्या हुआ जो प्रिय तुम मेरी नहीं
पर मैं तो सिर्फ तुम्हारा हूं।

तुम न अपनाओ गिला नहीं
इंसान मैं बड़ा ही प्यारा हूं
समझूंगा की तुम लहरें हो
और मैं सिर्फ किनारा हूं
क्या हुआ जो प्रिय तुम मेरी नहीं
पर मैं तो सिर्फ तुम्हारा हूं।

जो दे न सकी तुम हाथ मुझे
तो कम से कम कुछ साथ ही दो
जो बन न सकी जीवन मेरी
तो जीने का अहसास ही दो
क्या हुआ जो प्रिय तुम मेरी नहीं
पर मैं तो सिर्फ तुम्हारा हूं।

हृदय रहा मेरा पाक सदा
तुम्हें पाने की कभी चाह न की
बेशक कितने ही कष्ट सहे
पर मूंह से कभी भी आह न की
क्या हुआ जो प्रिय तुम मेरी नहीं
पर मैं तो सिर्फ तुम्हारा हूं।

दुःख मैंने तुमको दिए बहुत
हो सके तो करना माफ प्रिय
मेरी भी कुछ मजबूरी थी
वरना है दिल मेरा साफ प्रिय
क्या हुआ जो प्रिय तुम मेरी नहीं
पर मैं तो सिर्फ तुम्हारा हूं।

मैंने माना है लहर तुम्हें
और खुद को माना किनारा है
मिलती रहना तुम कभी-कभी
तुम बिन न कोई सहारा है
क्या हुआ जो प्रिय तुम मेरी नहीं
पर मैं तो सिर्फ तुम्हारा हूं।

संभव ही नहीं पाना तुमको
मैं योग्य तुम्हारे हूं ही नहीं
मैं बदबख्त बहुत हूं प्रिय
मैं तो खुशियों के योग्य नहीं
क्या हुआ जो प्रिय तुम मेरी नहीं
पर मैं तो सिर्फ तुम तुम्हारा हूं।