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1 महीने में कमाएं 25-30 पर्सेंट लाभ

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आप स्टॉक में तेजी से अपने पैसे को डबल करना चाहते हैं, तो आज हम आपके लिए लाए हैं कुछ ऐसी ही जानकारी जिसकी मदद से आप 50 हजार रुपये तक लगाकर एक महीने में 25-30 पर्सेंट का मुनाफा बड़े आराम से कमा सकते हैं। यहां हम आपको बता रहे हैं, कुछ ऐसे ही शेयर के बारे में जो आपको अच्छा रिटर्न दे सकते हैं। 
1. मारुति सुजुकी इंडिया मारुति के एक शेयर का प्राइस इस समय 9448 रुपये है। इस शेयर ने एक हफ्ते पहले ही 10 हजार का आकंड़ा छूआ था। सूत्रों के अनुसार कंपनी की ब्रिक्री इस तिमाही अच्छी रही है। इसका रिजल्ट अच्छा रह सकता है। ऐसे में कंपनी का शेयर अगले एक महीने में 11-12 हजार रुपये तक जा सकता है।
2. यस बैंक  यस बैंक प्राइवेट सेक्टर बैंकों में सबसे अच्छा परफॉर्म कर रहा है। कंपनी के एक स्टॉक की कीमत इस समय करीब 333 रुपये है। इस तिमाही इस बैंक के नतीजे भी अच्छे रहने वाले हैं। उम्मीद की जा रही है कि ये स्टॉक अगले एक महीने में 400-450 रुपये तक जा सकता है।
3. ल्यूपिन फार्मा सेक्टर का ये स्टॉक काफी मजबूत नजर आता है। पिछले कुछ महीनों से यह स्टॉक नीचे रहा है, लेकिन आने वाले समय में इसके ऊपर उठने की संभावना ज्यादा ह…

जीवन की रणभूमि

जीवन की इस रणभूमि में
एक खेल नया मैं सीख गया
इस खेल में कभी मैं जीत गया
इस खेल में कभी मैं  हार गया।

जब तक न जीता इस खेल में मैं
न हार मैंने स्वीकार किया
जीवन की इस रणभूमि में
एक खेल नया मैं सीख गया।

सीखा तो मैंने यह भी है
कि भाग्य बाद में आता है
पहले मेहनत, विश्वास जरूरी है
जीवन की इस रणभूमि में
एक खेल नया मैं सीख गया।

जब हारा मैं मुझे चोट लगी
पर उस चोट से ये बात याद आई
भगवान के आगे दुनिया में
शक्ति किसी की नहीं चलती
पर बना चोट खाए तो
मूर्ति भी उनकी नहीं बनती।

ये सब बातें तो सीख गया
अब ये बात भी सीखा "नितेश"
जीवन में औरों को भी मैं
दूंगा सदा यही संदेश।

भगत सिंह अब याद नहीं

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भगत सिंह का था ये सपना
हो आजाद देश ये अपना
हो करके भारत आजाद,
करता नहीं है उसको याद।

व्यर्थ गई शायद उसकी जवानी
भूले सब उसकी कुर्बानी
हंस कर जो फांसी पर झूला
उसको सारा देश है भूला।

जिसने मौत की चिंता न की
भारत मां की रक्षा को
आज भला क्यों जाने लोग
भूल गए उस योद्धा को।

जाने कितने जन्म दिवस और जयंती पर
भारत छुट्टी मनाता है
लेकिन इतनी छुट्टी में भी
वह वीर कहीं नहीं आता है।

नहीं "नितेश" को कोई शिकवा
गांधी नेहरू के सम्मान से
मुझको तो है उनसे शिकायत
जो बने हुए हैं अनजान से।

धूमधाम से हर नेता व मंत्री
गांधी जयंती मनाते हैं
करके याद वे गांधी जी को
लाखों रुपये उड़ाते हैं।

प्रधानमंत्री खुद राजघाट पर
श्रद्धा के फूल चढ़ाता है
लेकिन शहीदी दिवस पर भी नेताओं को
यह नाम याद नहीं आता है।

उसका नाम नहीं सभी होठ पर
उसकी फोटो न किसी नोट पर
कम से कम इतना तो कर लो
नाम लो उसका अपने होठ पर।

देश की खातिर कष्ट सहा वह
देश से उसको प्यार था
जिसने उसे फांसी चढवाई
वह उसका अपना यार था।

शीश झुकाकर भगत सिंह को
करता नमन "नितेश" है
करो नमन तुम भगत सिंह का
यह मेरा संदेश है।


दो दिल मिल गए हैं......मगर चुपके-चुपके

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दो दिल मिल रहे हैं, मगर चुपके-चुपके,
सबको हो रही है खबर चुपके-चुपके....

हिंदी फिल्म परदेस फिल्म का ये गाना नीतीश कुमार (जेडीयू) और नरेंद्र मोदी (बीजेपी) के एक बार फिर से एकसाथ आने की पूरी कहानी बताता है। दरअसल बुधवार (26 जुलाई 2017) को अचानक नीतीश कुमार का बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना, आरजेडी से किनारा करने का घटनाक्रम बहुत तेजी से हुआ, लेकिन इसकी स्क्रिप्ट धीरे-धीरे व काफी दिनों से लिखी जा रही थी। पर जैसे ही तेजस्वी यादव भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे, वैसे ही इस पुराने रिश्ते को एक डोर मिल गई और इस्तीफे के कुछ घंटे बाद ही बीजेपी ने जेडीयू को सपोर्ट देकर सुशासन बाबू के एक बार फिर सीएम बनने का रास्ता साफ कर दिया और दोनों ने खुलकर दुनिया के सामने मिलने का ऐलान कर ही दिया।

  अब सवाल उठता है कि आखिर सच में नीतीश ने तेजस्वी पर लगे आरोपों व उसके बाद भी उप-मुख्यमंत्री पद से उनके  इस्तीफा न देने की वजह से महागठबंधन का साथ छोड़ इस्तीफा दिया या फिर कोई और वजह थी। अगर पिछले डेढ़ साल से अलग-अलग मुद्दों पर नरेंद्र मोदी के समर्थन में दिए गए नीतीश कुमार के बयानों को देखें, तो इस सवाल का ज…

खोखला समाज

मैं संत्रस्त हूं
भारत के आज से
इस खोखले समाज से
आने वाला कल मुझे बहुत डराता है
क्यों आज इंसान एक-दूसरे का घर जलाता है।मैं संत्रस्त हूं
देश के रखवालों से
रिश्वत के दलालों से
जाने कितने खूनी खेल ये खेलते हैं
देख कर खून के धब्बे उफ तक नहीं करते हैं।मैं संत्रस्त हूं
भारत की राजनीति से
नेताओं की नीति से
वोट बैंक की नीति इन्हें खूब रास आती है
इनके हर बात में राजनीति की बास आती है।

पैसा

मरना तो आसान होता है, जीना आसान नहीं होता
यदि पैसा हो पास तो कोई भी अनजान नहीं होता
टूट जाते हैं सब रिश्ते जब हम गरीब होते हैं
अगर पैसा रहे पास तो सब करीब होते हैं।

लाचार व्यक्ति

सड़क के चौराहे पर
एकतरफ थी बहुत भीड़-भार
वंही दूसरी तरफ कोने में
खड़ा था एक व्यक्ति लाचार
खुद को छिपाता हुआ
भीड़ से खुद को बचाता हुआ।

मैं बढ़ा उस भीड़ की तरफ
अपनी जिज्ञासा लिए
जायजा लेने हालात का
आखिर ये भीड़ कैसी
झगड़ा है किस बात का
अचानक उस भीड़ से निकला
एक व्यक्ति ये कहते
' ये धरती हमारी है, मारो उसे जो बिहारी है '।

मैं छुब्द था देखकर
इन लोगों की हंसी को
दूसरी और कोने में खड़े
उस शख्स की बेबसी को
खुद को बचाने की जद्दोजहद में
घिरा था वो इंसान
क्या वाकई ये लोग
ले लेंगे उसकी जान।

पर क्यों हो रहा है
कुछ लोगों के साथ ये व्यवहार
क्या सिर्फ इसलिए की
उनकी जन्म भूमि है बिहार ।

बहुत ही बेहुदे हैं वो लोग
जो पहुंचा रहे हैं
इसी देश के निवासी को चोट
क्या अपने ही देश में रहने का
इन्हें हक नहीं है
क्या भारत बिहार का राज्य नहीं है ?

बहुत शर्मनाक है ये
जो इस देश के रहने वालों पर
इस तरह अत्याचार हो
और देश की सरकार
चुपचाप बैठी लाचार हो।

यही सरकार बांग्लादेशियों को
देश की नागरिकता दिलाती है
इनके विषय पर शोर मचाती है
लेकिन अपनों के वक्त में
गूंगी हो जाती है।

क्या सफेद पोशाक धारियों से
इन लोगों की करुणा देखी नहीं …