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Instant Loan App: क्या आप भी फंस रहे हैं चीनी लोन ऐप के जाल में? इन बातों का रखेंगे ध्यान तो नहीं होगी ठगी

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Photo Credit : The Statesman कोरोना काल खत्म हो चुका है, लेकिन इस काल में आया एक वायरस अब भी जिंदा है। यह वायरस कोरोना से कम खतरनाक नहीं है। यह अंदर ही अंदर परिवार को खत्म कर रहा है। जी हां, हम जिस वायरस की बात कर रहे हैं, उसका नाम है चीनी लोन ऐप। आज भी जालसाज चीनी लोन ऐप या अवैध लोन ऐप के जरिये लोगों को ठग रहे हैं। कई लगातार ठगे जा रहे हैं, जबकि कई लोग हारकर अपनी सांसों की डोर ही तोड़ रहे हैं। हाल ही में मध्य प्रदेश में एक ही परिवार के चार लोगों ने लोन ऐप के टॉर्चर से परेशान होकर अपनी जान दे दी। चीनी लोन ऐप से ठगी के सैकड़ों मामले देश के अलग-अलग राज्यों में रोज आते हैं। तमाम कोशिशों के बाद भी इन पर लगाम नहीं लग रही है। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि आखिर क्यों लोग इसकी जाल में फंस रहे हैं और इससे कैसे बचा जाए।  दरअसल, कोरोना काल में लाखों लोग बेरोजगार हुए, लाखों के बिजनेस डूब गए, उनकी जमा पूंजी सब खत्म हो गई। कई परिवार कर्ज में डूबते गए और इनमें से कई ने आत्महत्या का रास्ता भी चुना। अचानक आए इस आपदा को जालसाजों ने अवसर की तरह लिया और उस दौरान शुरू हुआ ठगी का एक नया तरीका। लोगों को तब ...

ये स्टॉक दे सकते हैं 1 साल में 50-60 पर्सेंट तक रिटर्न

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मार्केट के गिरावट में भी हैं कमाई के मौके पिछले एक महीने से भारतीय शेयर बाजार गिरा पड़ा है। ऐसे में कई निवेशक मार्केट में पैसा लगाने से बच रहे हैं। इस एक महीने में स्माल कैप, मिड कैप व लार्ज कैप से जुड़ी अधिकतर कंपिनयों का कैपिटल कम हुआ है। ऐसे में लोग पैसा लगाने से डर रहे हैं। पर यह सही समय है पैसे से पैसा बनाने का। अगर आप 1-2 साल तक के नजरिये से इस गिरावट में निवेश करें तो आपको 40-50 प्रतिशत तक रिटर्न मिल सकता है। यहां मैं आपको बताऊंगा कुछ ऐसे ही कंपनियों के स्टॉक के बारे में जो फंडामेंटली काफी मजबूत हैं पर बाजार की गिरावट में काफी नीचे आ गए हैं। यह अगले 5-6 महीने में ही आपको 25 पर्सेंट तक रिटर्न दे सकते हैं। 1. बीईएमएल (BEML) - बीईएमएल रक्षा उपकरण बनाती है। यह पब्लिक सेक्टर की कंपनी है। मौजूदा समय में इसके एक स्टॉक की कीमत करीब 1049 रुपये है। इस कंपनी का 52 वीक लो 996 रुपये है, जबकि 52 वीक हाई 1947 रुपये है। ऐसे में अगर आप अभी इस कंपनी में निवेश करेंगे तो संभावना है कि 1 साल के अंदर आपको 50 प्रतिशत से ऊपर का रिटर्न मिल जाए। 2. ल्यूपिन (LUPIN) - ल्यूपिन की गिनती फार्मा स...

1 महीने में कमाएं 25-30 पर्सेंट लाभ

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आप स्टॉक में तेजी से अपने पैसे को डबल करना चाहते हैं, तो आज हम आपके लिए लाए हैं कुछ ऐसी ही जानकारी जिसकी मदद से आप 50 हजार रुपये तक लगाकर एक महीने में 25-30 पर्सेंट का मुनाफा बड़े आराम से कमा सकते हैं। यहां हम आपको बता रहे हैं, कुछ ऐसे ही शेयर के बारे में जो आपको अच्छा रिटर्न दे सकते हैं।  1. मारुति सुजुकी इंडिया मारुति के एक शेयर का प्राइस इस समय 9448 रुपये है। इस शेयर ने एक हफ्ते पहले ही 10 हजार का आकंड़ा छूआ था। सूत्रों के अनुसार कंपनी की ब्रिक्री इस तिमाही अच्छी रही है। इसका रिजल्ट अच्छा रह सकता है। ऐसे में कंपनी का शेयर अगले एक महीने में 11-12 हजार रुपये तक जा सकता है। 2. यस बैंक  यस बैंक प्राइवेट सेक्टर बैंकों में सबसे अच्छा परफॉर्म कर रहा है। कंपनी के एक स्टॉक की कीमत इस समय करीब 333 रुपये है। इस तिमाही इस बैंक के नतीजे भी अच्छे रहने वाले हैं। उम्मीद की जा रही है कि ये स्टॉक अगले एक महीने में 400-450 रुपये तक जा सकता है। 3. ल्यूपिन फार्मा सेक्टर का ये स्टॉक काफी मजबूत नजर आता है। पिछले कुछ महीनों से यह स्टॉक नीचे रहा है, लेकिन आने वाले समय ...

जीवन की रणभूमि

जीवन की इस रणभूमि में एक खेल नया मैं सीख गया इस खेल में कभी मैं जीत गया इस खेल में कभी मैं  हार गया। जब तक न जीता इस खेल में मैं न हार मैंने स्वीकार किया जीवन की इस रणभूमि में एक खेल नया मैं सीख गया। सीखा तो मैंने यह भी है कि भाग्य बाद में आता है पहले मेहनत, विश्वास जरूरी है जीवन की इस रणभूमि में एक खेल नया मैं सीख गया। जब हारा मैं मुझे चोट लगी पर उस चोट से ये बात याद आई भगवान के आगे दुनिया में शक्ति किसी की नहीं चलती पर बना चोट खाए तो मूर्ति भी उनकी नहीं बनती। ये सब बातें तो सीख गया अब ये बात भी सीखा "नितेश" जीवन में औरों को भी मैं दूंगा सदा यही संदेश। 

भगत सिंह अब याद नहीं

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भगत सिंह का था ये सपना हो आजाद देश ये अपना हो करके भारत आजाद, करता नहीं है उसको याद। व्यर्थ गई शायद उसकी जवानी भूले सब उसकी कुर्बानी हंस कर जो फांसी पर झूला उसको सारा देश है भूला। जिसने मौत की चिंता न की भारत मां की रक्षा को आज भला क्यों जाने लोग भूल गए उस योद्धा को। जाने कितने जन्म दिवस और जयंती पर भारत छुट्टी मनाता है लेकिन इतनी छुट्टी में भी वह वीर कहीं नहीं आता है। नहीं "नितेश" को कोई शिकवा गांधी नेहरू के सम्मान से मुझको तो है उनसे शिकायत जो बने हुए हैं अनजान से। धूमधाम से हर नेता व मंत्री गांधी जयंती मनाते हैं करके याद वे गांधी जी को लाखों रुपये उड़ाते हैं। प्रधानमंत्री खुद राजघाट पर श्रद्धा के फूल चढ़ाता है लेकिन शहीदी दिवस पर भी नेताओं को यह नाम याद नहीं आता है। उसका नाम नहीं सभी होठ पर उसकी फोटो न किसी नोट पर कम से कम इतना तो कर लो नाम लो उसका अपने होठ पर। देश की खातिर कष्ट सहा वह देश से उसको प्यार था जिसने उसे फांसी चढवाई वह उसका अपना यार था। शीश झुकाकर भगत सिंह को करता नमन "नितेश" है करो नमन तुम भगत सिंह...

दो दिल मिल गए हैं......मगर चुपके-चुपके

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दो दिल मिल रहे हैं, मगर चुपके-चुपके, सबको हो रही है खबर चुपके-चुपके.... हिंदी फिल्म परदेस फिल्म का ये गाना नीतीश कुमार (जेडीयू) और नरेंद्र मोदी (बीजेपी) के एक बार फिर से एकसाथ आने की पूरी कहानी बताता है। दरअसल बुधवार (26 जुलाई 2017) को अचानक नीतीश कुमार का बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना, आरजेडी से किनारा करने का घटनाक्रम बहुत तेजी से हुआ, लेकिन इसकी स्क्रिप्ट धीरे-धीरे व काफी दिनों से लिखी जा रही थी। पर जैसे ही तेजस्वी यादव भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे, वैसे ही इस पुराने रिश्ते को एक डोर मिल गई और इस्तीफे के कुछ घंटे बाद ही बीजेपी ने जेडीयू को सपोर्ट देकर सुशासन बाबू के एक बार फिर सीएम बनने का रास्ता साफ कर दिया और दोनों ने खुलकर दुनिया के सामने मिलने का ऐलान कर ही दिया।   अब सवाल उठता है कि आखिर सच में नीतीश ने तेजस्वी पर लगे आरोपों व उसके बाद भी उप-मुख्यमंत्री पद से उनके  इस्तीफा न देने की वजह से महागठबंधन का साथ छोड़ इस्तीफा दिया या फिर कोई और वजह थी। अगर पिछले डेढ़ साल से अलग-अलग मुद्दों पर नरेंद्र मोदी के समर्थन में दिए गए नीतीश कुमार के बयानों को देखे...

खोखला समाज

मैं संत्रस्त हूं भारत के आज से इस खोखले समाज से आने वाला कल मुझे बहुत डराता है क्यों आज इंसान एक-दूसरे का घर जलाता है। मैं संत्रस्त हूं देश के रखवालों से रिश्वत के दलालों से ...

पैसा

मरना तो आसान होता है, जीना आसान नहीं होता यदि पैसा हो पास तो कोई भी अनजान नहीं होता टूट जाते हैं सब रिश्ते जब हम गरीब होते हैं अगर पैसा रहे पास तो सब करीब होते हैं।

लाचार व्यक्ति

सड़क के चौराहे पर एकतरफ थी बहुत भीड़-भार वंही दूसरी तरफ कोने में खड़ा था एक व्यक्ति लाचार खुद को छिपाता हुआ भीड़ से खुद को बचाता हुआ। मैं बढ़ा उस भीड़ की तरफ अपनी जिज्ञासा लिए जायजा लेने हालात का आखिर ये भीड़ कैसी झगड़ा है किस बात का अचानक उस भीड़ से निकला एक व्यक्ति ये कहते ' ये धरती हमारी है, मारो उसे जो बिहारी है '। मैं छुब्द था देखकर इन लोगों की हंसी को दूसरी और कोने में खड़े उस शख्स की बेबसी को खुद को बचाने की जद्दोजहद में घिरा था वो इंसान क्या वाकई ये लोग ले लेंगे उसकी जान। पर क्यों हो रहा है कुछ लोगों के साथ ये व्यवहार क्या सिर्फ इसलिए की उनकी जन्म भूमि है बिहार । बहुत ही बेहुदे हैं वो लोग जो पहुंचा रहे हैं इसी देश के निवासी को चोट क्या अपने ही देश में रहने का इन्हें हक नहीं है क्या भारत बिहार का राज्य नहीं है ? बहुत शर्मनाक है ये जो इस देश के रहने वालों पर इस तरह अत्याचार हो और देश की सरकार चुपचाप बैठी लाचार हो। यही सरकार बांग्लादेशियों को देश की नागरिकता दिलाती है इनके विषय पर शोर मचाती है लेकिन अपनों के वक्त में गूंगी हो जाती ह...

मैं बेटी हूं...

न मैं दुनिया में आई थी, न अपनी आंखें खोल पाई थी फिर भी मृत्यु शैय्या पर लेटी हूँ क्यों, क्योंकि मैं बेटी हूं? जबकि उत्तम कर्म मेरा है फिर क्यों मुश्किल जन्म मेरा है वो जो मां की गोदी में लेटा है इसलिए की वो बेटा है? दुख जो मां-बाप को देता है और नहीं कोई, वो बेटा है सुख मां-बाप को जो पहुंचाती जन्म नहीं है वो ले पाती। क्यों अब भी अभिशाप है बेटी क्यों आखिर मां जन्म न देती खुशी मनातें हैं सब लोग जब जन्म लेता है बेटा और जन्म जो ले ले बेटी पिता कंही उदास है लेटा।

डीडीए फ्लैट्स

आजकल हर तरफ है दिल्ली में डीडीए फ्लैट्स का शोर हर कोई फ्लैट्स खरीदने के लिए कर रहा है जोड़-तोड़ कोई निकाल रहा है अपनी जिन्दगी भर की कमाई तो किसी ने लोन के लिए है अर्जी लगाई हर किसी को है इंतजार आखिर कब निकलेगा ड्रॉ सिंगल ही सही लेकिन अपना एक घर हो हर कोई देख रहा है खुली आंखों से सपना हे भगवान इनके सपनो को बचाए रखना क्या भ्रष्ट अफसरों से बच पाएगा सपना इनका वो अफसर जिन्हें कोई परवाह नहीं किसी के जीने मरने से वो क्या करेंगे इनके सपनों की परवाह जिन्हें सिर्फ मतलब है अपनी जेब गर्म करने से। पता नहीं क्या होगा इसका परिणाम लेकिन तय है रंगीन होगी अफसरों की शाम हो सकता है सामने आए एक और घोटाला और निकल जाए लाखों लोगों के सपनो का दिवाला । घोटाला सामने आते ही सरकार गंभीरता दिखाएगी मामले की जांच तेजी से कराएगी कुछ दिन बाद तेजी से हो रही जांच डी-रेल हो जाएगी बड़ी मछलियां आजाद घूमेंगी और छोटी को जेल जाएगी।

क्या हुआ जो प्रिय तुम मेरी नहीं

क्या हुआ जो प्रिय तुम मेरी नहीं पर मैं तो सिर्फ तुम्हारा हूं। तुम न अपनाओ गिला नहीं इंसान मैं बड़ा ही प्यारा हूं समझूंगा की तुम लहरें हो और मैं सिर्फ किनारा हूं क्या हुआ जो प्रिय तुम मेरी नहीं पर मैं तो सिर्फ तुम्हारा हूं। जो दे न सकी तुम हाथ मुझे तो कम से कम कुछ साथ ही दो जो बन न सकी जीवन मेरी तो जीने का अहसास ही दो क्या हुआ जो प्रिय तुम मेरी नहीं पर मैं तो सिर्फ तुम्हारा हूं। हृदय रहा मेरा पाक सदा तुम्हें पाने की कभी चाह न की बेशक कितने ही कष्ट सहे पर मूंह से कभी भी आह न की क्या हुआ जो प्रिय तुम मेरी नहीं पर मैं तो सिर्फ तुम्हारा हूं। दुःख मैंने तुमको दिए बहुत हो सके तो करना माफ प्रिय मेरी भी कुछ मजबूरी थी वरना है दिल मेरा साफ प्रिय क्या हुआ जो प्रिय तुम मेरी नहीं पर मैं तो सिर्फ तुम्हारा हूं। मैंने माना है लहर तुम्हें और खुद को माना किनारा है मिलती रहना तुम कभी-कभी तुम बिन न कोई सहारा है क्या हुआ जो प्रिय तुम मेरी नहीं पर मैं तो सिर्फ तुम्हारा हूं। संभव ही नहीं पाना तुमको मैं योग्य तुम्हारे हूं ही नहीं मैं बदबख्त बहुत हूं प्रिय मैं तो खुशियो...

मैं भारत हूं

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मैं भारत हूं लोकतंत्र की सबसे बड़ी इमारत हूं धर्मनिरपेक्षता का किला हूं कई विविधताओं से मिला हूं। मेरी ऊंचाई विवादास्पद है क्योंकि यंहा की राजनीती हास्यास्पद है अब नहीं रहा मैं लोकतंत्र बन गया हूं अब मैं गन-तंत्र। आज मेरे अन्दर अजब सा शोर है मुझे बनाने वाला कई नेता चोर है बन गया हूं आज मैं थीएटर जहां बैठा है गुंडा और फ़िल्मी एक्टर। मैं बन गया हूं राजनीती के खेल का मैदान जिसमे खेलने वाला हर कोई है बेईमान हर कोई अपने स्वार्थ के लिए खेलता है यंहा सवाल पूछने के पैसे वसूलता है। मेरे मन में है आज एक भयानक सा डर मुझे गैरों से ज्यादा है अपनों से डर मारना चाहा जिसने मुझे नोट के लिए मेरे रखवालों ने उसे छोड़ना चाहा वोट के लिए। मुझे बना दिया है डब्ल्यूडब्ल्यूई का रिंग जहां नेता आपस में करते हैं फाइटिंग अब नहीं यंहा देश के हित की बात होती है न जाने कितनी बार संसद की कार्यवाही बर्खास्त होती है। मेरी करुणा को नितेश ने अपनी कविता में उतरा है जागो भारत के लोगों मुझे तुम्हारा ही सहारा है डूब रहा हूं मैं मुझे किनारा चाहिए बचा लो मुझे गिरने से मुझे सहारा चाहिए

मेरी मां

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उस रात चैन से न सोई थी मां मुझे विदा करते वक्त रोई थी मां अक्सर मेरी आंख भर आती है जब भी मां मुझे याद आती है निकला था मजबूरी में घर छोड़ कर मैं पैसा कमाने बीमार पिता की चिंता और मां की लाचारगी मिटाने जब भी मेरी फोन पर मां से बात होती है घर की परेशानियों को लेकर मां उदास होती है अच्छा नहीं लगता है मां का यूं उदास होना सबसे नजरें बचाकर घर के किसी कोने में रोना आज भी कोई कमी नहीं आई है मां के प्यार में तरसती हैं उसकी नाम आंखें मेरे आने के इंतजार में जब जाए मिलने मां से तो मिलना हंस कर नितेश वरना मां सोचेगी की परदेश में बेटा खुश नहीं है अब तो बस एक ही हसरत है कि बेटा होने का फर्ज निभाऊं मैं कमाकर जल्द ही ढेर सा पैसा घर का कर्ज उतारूं मैं।

मोबाइल की चाहत

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हां एक मोबाइल चाहिए मुझे मोबाइल की कमी खूब खलती है तब तकलीफ होती है मुझे जब मोबाइल की घंटी बजती है बिना मोबाइल कॉलेज जाना अच्छा नहीं लगता है कॉलेज में हर कोई मोबाइल से बात करता है इसी कारण लड़कियों से मैं दोस्ती नहीं करता हूं बहुत आता है क्रोध जब अपने दोस्तों से पीसीओ से बात करता हूं नाम तो मेरा 'नितेश' है पर नित-ऐश नहीं है मोबाइल ले तो मैं भी लूं पर जेब में कैश नहीं है हर महीने पिता जी भेजते हैं पांच सौ रुपये मोबाइल की चाहत में अब इन पैसों में ही बचत करता हूं अब चेहरे पर मेरे आती है स्माइल कि अगले साल मैं निश्चय ही ले लूंगा मोबाइल।

खुशी भी और गम भी

बहुत लंबे समय से मैं कुछ लिख नहीं पा रहा था। दरअसल पिछले दो-तीन महीनों से मैं अपने भविष्य और करियर बनाने की जद्दोजहद में लगा हुआ था। दो महीने अमर उजाला में इन्टर्न किया। इन्टर्न के दौरान ही टेस्ट दिया जिसमे पास भी हुआ, पास होने की खुशी भी हुई और थोड़ी निराशा भी। दरअसल अनुवाद में एक छोटी सी गलती की वजह से मुझे जूनियर सब-एडिटर से ट्रेनी सब-एडिटर बना दिया गया। पहले तो इस बात से निराशा हुई। इसके बाद ये जान कर कि मुझे अलीगढ़ भेजा जा रहा है, एक बार फिर निराशा हुई। बचपन से जिस दिल्ली में रहा, जिस दिल्ली में बड़ा हुआ, जिस दिल्ली में लोग दूसरे शहरों से आते हैं मुझे उसी शहर को छोड़कर जाना था, निराशा थी लेकिन करियर को ध्यान में रखकर मैं जॉइन करने 20 अप्रैल 2010 को अलीगढ़ आ गया। किताबों में पढ़ा था अलीगढ के बारे में, यहां के अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के बारे में। किस्मत ने इस शहर में रहने का मौका भी दिया। यहां आए हुए अब मुझे दो महीने से अधिक हो चुके हैं लेकिन आज भी मैं यहां अपने आपको असहज महसूस कर रहा हूं। यहां मुझे बहुत ही परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लोग जिसे तालीम और तहजीब का शहर कहते...

खून का रिश्ता

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आया कैसा कलयुग देखो मानव मतलब वाला है, जाने किस माया में आकर खूं ममता का कर डाला है। जिसने तुझको जन्म दिया है जिसने तुझको पाला है पर नारी के खातिर तुने मां-बाप को घर से निकाला है साथ दिया तूने पत्नी का दूध का रिश्ता तोड़कर खून किया तूने ममता का हाथ मां-बाप पर छोड़ कर। जाने तूं कैसा निर्दयी है कैसा फ़र्ज़ निभाता है पूछे बात मां- बाप जो कोई तूं सीना छलनी कर जाता है। तुझसे तो बेहतर कुत्ता है रोटी का फ़र्ज़ निभाता है मारे कितना मालिक फ़िर भी सदा ही दुम हिलाता है। रोटी का संबंध है उसका सदा ही साथ निभाता है पालनकर्ता की रक्षा को अपना खून बहाता है। है खून का रिश्ता तेरा फिर भी न साथ निभाता है पत्नी के कारण उनसे तूं रोटी का संबंध हटाता है।

मां

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मैंने पाया इस दुनिया में होती है सबसे प्यारी मां होते हैं वो किस्मत वाले होती है पास में जिनके मां। मां से तुमको ये जान मिली मां से तुमको पहचान मिली मुश्किल है जीवन मां के बिना मां से ये जीवन दान मिली। वो मां ही तो थी जिसने बच्चे से है तुम्हें बड़ा किया गिरते थे जब तुम बचपन में मां नें ही तुमको खड़ा किया। मां नें तुम्हारे खातिर जानें कितने ही कष्ट सहे होंगे सहकर इतने कष्टों को भी दुर्वचन कभी न कहें होंगे न जानें कितनी ही रातें वो तुम्हारे खातिर जागी होगी इस दुनिया की कितनी सुविधा तुम्हारे लिए त्यागी होगी। तुम्हे देख कभी वो पीड़ा में कितनी व्याकुल होती होगी चेहरे पर हंसी देखने को कितनी आकुल होती होगी। अब वक्त तुम्हारा आया है सोचो मां ने क्या पाया है जिसने तुमको दी खुशी सदा उसको ही तुमने रुलाया है।

गरीब

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मैं जानता हूं औरों की तरह तुम भी, मेरी दशा देख मुस्कुरा रहे हो। मेरी लाचारगी दोस्तों को दिखा, मेरा तमाशा बना रहे हो। पर ये क्या, तुम जा रहे हो ? ठहरो कि मैं तुम्हे और हंसाता हूं, तुम्हें अपना परिचय कराता हूं। मेरे घर वाले मुझे बदनसीब और दुनिया वाले शायद गरीब कहतें हैं। गरीब इसलिए, क्योंकि, मैं नहीं कर पाता अपने परिवार का जीविकोपार्जन। बदनसीब इसलिए, क्योंकि , मैं नहीं भर पाया अपने भूखे बच्चों का पेट। जो भूख से तड़पते, चढ़ गए मौत की भेंट असंख्य भारतीय की तरह , वह मेरी भी करीबी है। और जिसने मेरी ऐसी दशा की है, वह गरीबी है। शायद तुम देख पाए सिर्फ़ , मेरे थोड़े से बदन को ढ़कते , मेरे फटे पुराने वस्त्र को पर नहीं देख पाए तुम मेरे भूखे पेट को, जो खाने के इंतज़ार में है बैठा हुआ। शायद नहीं देख पाए तुम , कमजोरी से दबे हुए मेरे गाल को मेरी लड़खड़ाती चाल को। पर तुम कैसे समझोगे हमारी करुणा, तुम भी होगे उन धनि लोगों की तरह , जो गरीब को देख मुस्कुराते हैं। हम खाने के इंतज़ार में कुत्ते की मौत मरते हैं, ...

मेरा प्यारा भारत

मेरा भारत देश निराला , होता यहां है खूब घोटाला। हर जगह यहां है भ्रष्टाचार, हो जैसे ये कुटीर व्यापार । हो नेता या सरकारी अफसर, ये रहता सबके मन के अंदर। ये लगता है सबको प्यारा, काण्ड हुआ तेलगी तहलका चारा । कहे "नितेश" भारत को सबसे प्यारा देश, क्योंकि यहाँ के कई मंत्रियों पर चल रहा है केस.