खोखला समाज
मैं संत्रस्त हूं भारत के आज से इस खोखले समाज से आने वाला कल मुझे बहुत डराता है क्यों आज इंसान एक-दूसरे का घर जलाता है। मैं संत्रस्त हूं देश के रखवालों से रिश्वत के दलालों से ...
नजर न हो तो आंखों के सामने अंधेरा, इस जहां में अंधेरा, चारों और अंधेरा। मैं रखूंगा सब पर नजर, बनूंगा आपकी नजर। अपनी आंखों से बताऊंगा इस संसार का चेहरा।