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दिसंबर, 2010 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

लाचार व्यक्ति

सड़क के चौराहे पर एकतरफ थी बहुत भीड़-भार वंही दूसरी तरफ कोने में खड़ा था एक व्यक्ति लाचार खुद को छिपाता हुआ भीड़ से खुद को बचाता हुआ। मैं बढ़ा उस भीड़ की तरफ अपनी जिज्ञासा लिए जायजा लेने हालात का आखिर ये भीड़ कैसी झगड़ा है किस बात का अचानक उस भीड़ से निकला एक व्यक्ति ये कहते ' ये धरती हमारी है, मारो उसे जो बिहारी है '। मैं छुब्द था देखकर इन लोगों की हंसी को दूसरी और कोने में खड़े उस शख्स की बेबसी को खुद को बचाने की जद्दोजहद में घिरा था वो इंसान क्या वाकई ये लोग ले लेंगे उसकी जान। पर क्यों हो रहा है कुछ लोगों के साथ ये व्यवहार क्या सिर्फ इसलिए की उनकी जन्म भूमि है बिहार । बहुत ही बेहुदे हैं वो लोग जो पहुंचा रहे हैं इसी देश के निवासी को चोट क्या अपने ही देश में रहने का इन्हें हक नहीं है क्या भारत बिहार का राज्य नहीं है ? बहुत शर्मनाक है ये जो इस देश के रहने वालों पर इस तरह अत्याचार हो और देश की सरकार चुपचाप बैठी लाचार हो। यही सरकार बांग्लादेशियों को देश की नागरिकता दिलाती है इनके विषय पर शोर मचाती है लेकिन अपनों के वक्त में गूंगी हो जाती ह...

मैं बेटी हूं...

न मैं दुनिया में आई थी, न अपनी आंखें खोल पाई थी फिर भी मृत्यु शैय्या पर लेटी हूँ क्यों, क्योंकि मैं बेटी हूं? जबकि उत्तम कर्म मेरा है फिर क्यों मुश्किल जन्म मेरा है वो जो मां की गोदी में लेटा है इसलिए की वो बेटा है? दुख जो मां-बाप को देता है और नहीं कोई, वो बेटा है सुख मां-बाप को जो पहुंचाती जन्म नहीं है वो ले पाती। क्यों अब भी अभिशाप है बेटी क्यों आखिर मां जन्म न देती खुशी मनातें हैं सब लोग जब जन्म लेता है बेटा और जन्म जो ले ले बेटी पिता कंही उदास है लेटा।